INSAAN

कसूर मेरा इतना है कि मैं इंसान बन गया, तुम्हारे ज़हन  में बसी पाक़  तस्वीर से गिर गया, दोष गलतियों को दूँ या खुद को, वो खुद ब खुद हुयी इन्सान की फितरत के  चलते, मेरा कसूर तो बस इतना था, कि मैं इन्सान बन गया।

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Waqt aur Ishq

जिस दिन वक्त ने चाल मांगी थी  मोहब्बत ने जंग छेड़ी थी  एक लम्हा लम्हा बढ़ने को तैयार था  दूजा एक पल में थमने को बेक़रार था  जाने क्या फतह किसकी हुई  न वक़्त ने रुकना स़ीखा  और न इश्क ने झुकना

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