मंजिल है अब बहुत निकट

मंजिल है अब बहुत निकट चलते चलते जब कदम तेरे डगमगाने लगे, पथ के पत्थर से पैर जब लड़खड़ाने लगे, न खोना साहस, क्योंकि मंजिल है अब बहुत निकट। जिस मंजिल के लिए चला तू डटकर अब तक, बिन लिये किसी की कोई ख़बर, है जिसके लिए आँखों में खाब अनगिनत, वो मंजिल है अब बहुत […]

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